बिहार दिवस में कृषि प्रदर्षनी का हुआ समापन, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किये गये पुरस्कृत

पटना (जागता हिंदुस्तान) कृषि विभाग के सचिव डाॅ॰ एन॰ सरवण कुमार द्वारा पटना के गाँधी मैदान में बिहार दिवस के अवसर पर कृषि पवेलियन में तीन दिवसीय 22-24 मार्च तक आयोजित कृषि प्रदर्षनी का समापन किया गया। इस प्रदर्शनी में जैविक कोरीडोर योजना के स्टाॅल के लिए प्रथम पुरस्कार संयुक्त निदेशक (रसायन), कम्पोस्ट एवं बायोगैस बिजेन्द्र चौधरी को दिया गया। जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के स्टाॅल को द्धितीय पुरस्कार से नवाजा गया तथा हर खेत को पानी-जलछाजन विकास के स्टाॅल को तृतीय पुरस्कार दिया गया, जिसे संयुक्त निदेशक (कृषि अभिंयत्रण), भूमि संरक्षण रवीन्द्र कुमार वर्मा ने ग्रहण किया। साथ ही, उनके द्वारा इस प्रदर्शनी में उमदा प्रदर्शनी के लिए अन्य प्रतिभागियों के बीच पुरस्कारों का वितरण भी किया गया।

सेन्टर आॅफ एक्सेलेंस, चण्डी (नालंदा) द्वारा उत्पादित सब्जी के पौध-रोपण सामग्री एवं सेन्टर आॅफ एक्सेलेंस, देसरी (वैशाली) द्वारा उत्पादित फलों के पौध-रोपन सामग्री का प्रदर्शन किया गया एवं लगभग 25000 रूपये का पौध रोपण के सामग्री की ब्रिकी की गई। इसके अतिरिक्त मशरूम, मधु, गुड़़़, वर्मी कम्पोस्ट आदि का भी प्रदर्शन एवं बिक्री किया गया। साथ ही, इस प्रदर्शनी में बिहार कृषि निवेेश प्रोत्साहन नीति द्वारा सम्पोषित चाचा चैधरी मशाला द्वारा लगभग 50,000 रूपये का मशाला, सुरू फुड एवं बेभरेज प्रा॰ लि॰ द्वारा 45000 रूपये का फ्रूट जूस की ब्रिकी की गई।

सचिव, कृषि ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में 05 चयनित गाँवों में बोरलाॅग इंस्टिच्युट फाॅर साऊथ एशिया (बीसा), डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्- पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिषद्, पटना के माध्यम से जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जैविक कोरीडोर योजन के अंतर्गत राज्य के 13 जिलों में 180 से ज्यादा किसानों समूहों को जैविक खेती के लिए अंगीकरण एवं प्रमाणीकरण के लिए सी॰2 प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। हर खेत को पानी योजना अंतर्गत जलछाजन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 1480 विभिन्न प्रकार के आधारभूत संरचना यथा चेक डैम, तालाब, साद अवरोधी बाँध आदि का निर्माण अगले 05 वर्षों में कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में भी जिला स्तर पर बिहार दिवस का आयोजन किया गया।

कुमार ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा गाँधी मैदान में आयोजित कृषि पवेलियन में ‘‘जल-जीवन-हरियाली’’ से संबंधित अवयवों का स्टाॅल एवं जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा ‘‘जल-जीवन हरियाली’’ अभियान के अंतर्गत पाँच मुख्य कार्यक्रम क्रियान्वित किये जा रहे हैं, यथा- जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम, फसल अवशेष प्रबंधन कार्यक्रम, फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित विशेष कृषि यंत्र बैंक, ‘‘हर खेत को सिंचाई का पानी’’-सूक्ष्म सिंचाई योजना, ‘‘हर खेत को सिंचाई का पानी’’-पक्का चैक डैम एवं अन्य जल छाजन कार्यक्रम तथा जैविक कोरिडोर योजना। इन सभी छः महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों पर आधारित नुक्कड़-नाटक एवं किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि पवेलियन में कृषि के क्षेत्र में हो रही नवीनत्तम तकनीकों की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराई गई। साथ ही, बिहार दिवस के अवसर पर आत्मा योजना के माध्यम से सभी जिलों के किसानों को कृषि पवेलियन में परिभ्रमण कराया गया। इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में पटनावासियों ने कृषि पवेलियन में आयोजित कृषि प्रदर्शनी का लुत्फ उठाया।

उन्होंने कहा कि ‘‘जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम’’ से संबंधित बिहार के कृषि संस्थान बोरलाॅग इंस्टिच्युट फाॅर साऊथ एशिया (बीसा), डाॅ॰ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्- पूर्वी क्षेत्र के लिए अनुसंधान परिषद्, पटना द्वारा जलवायु के अनुकूल फसल चक्र का चयन, मिट्टी एवं जलवायु के अनुकूल परिस्थितियों के अनुरूप संभावित फसल विविधीकरण, जल, पोषक तत्त्व एवं खरपतवार आदि का समुचित प्रबंधन, विभिन्न फसलों की समय पर बुआई के बारे में प्रचार-प्रसार किया गया। यांत्रिकरण योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों यथा हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्राॅ-बेलर के माध्यम से फसल के अवशेषों का प्रबंधन, बायोचार, समेकित कृषि प्रणाली आदि क्रियाओं के बारे में किसानों को जागरूक किया गया। प्रदर्शनी में मुख्य रूप से फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्रों की उपयोगिता तथा इस पर सरकार द्वारा दिये जा रहे अनुदान के विषय की जानकारी उपलब्ध कराई गई।

उन्होंने कहा कि उद्यान निदेशालय द्वारा इस प्रदर्शनी में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति का जीवंत प्रदर्शन किया गया। सूक्ष्म सिंचाई योजना के अंतर्गत किसानों को 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। भूमि संरक्षण निदेशालय द्वारा जलछाजन विकास कार्यक्रम के अंतर्गत जल संचयन संरचनाओं तथा शुष्क बागवानी की महत्ता को जीवंत प्रदर्शित किया गया।

इस मौके पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ॰ अरूण कुमार, कृषि निदेशक सावन कुमार, निदेशक उद्यान नन्द किशोर, अपर निदेशक (शष्य) धनन्जयपति त्रिपाठी, बसोका के निदेशक सुनील कुमार पंकज, निदेशक, पी॰पी॰एम॰ अशोक प्रसाद, निदेशक प्रसार शिक्षा (बी॰ए॰यू॰) डाॅ आर॰के॰ सोहाने सहित विभागीय मुख्यालय एवं क्षेत्र के पदाधिकारी/कर्मचारीगण सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आये किसान एवं आगन्तुक मौजूद थे।

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