कृषि मंत्री ने ‘‘राज्य में बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता’’ विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय सेमिनार का किया उद्घाटन

पटना । बिहार के कृषि विभाग के मंत्री कुमार सर्वजीत द्वारा शनिवार को ‘‘राज्य में बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता’’ विषय पर आयोजित एक राज्यस्तरीय सेमिनार का कृषि भवन, मीठापुर कृषि प्रक्षेत्र, पटना के आॅडोटोरियम में उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डाॅ॰ एन॰ विजयालक्ष्मी, संयुक्त सचिव (बीज), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ॰ एन॰ सरवण कुमार, सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना के द्व़ारा की गई।

इस अवसर पर मंत्री ने अपने सम्बोधन मेें कहा कि “राज्य में बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता” विषय पर राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन न केवल कृषि विभाग बल्कि राज्य के किसानों के उत्पादन में वृद्धि के लिये एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन में बीज एक महत्वपूर्ण उपादान है। यदि किसान के पास उर्वरक एवं सिंचाई की पूर्ण व्यवस्था हो, परन्तु बीज की गुणवत्ता सही नहीं हो तो निश्चित रूप से उनके उत्पादन में 40 से 60 प्रतिशत का ह्रास होगा। यदि किसानों को ससमय गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराया जाता है, तो उनका उत्पादन बढे़गा एवं उनकी आय में वृद्धि होगी। खाद्यान्न फसलों का बीज प्रतिस्थापन दर एक तिहाई होना चाहिए। राज्य में धान तथा गेहूँ का बीज प्रतिस्थापन दर 50 प्रतिशत है, जबकि मक्का का बीज प्रतिस्थापन दर 90 प्रतिशत से ऊपर है। राष्ट्रीय स्तर पर दलहनी एवं तलहनी फसलों का बीज प्रतिस्थापन दर एक तिहाई से कम है, कमोबेश राज्य में भी यही स्थिति है। चतुर्थ कृषि रोड मैप में पोषक अनाज, दलहन एवं तेलहन फसल के बीज के लिए विशेष प्रयास किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख क्विं॰ बीज की आवश्यकता होती है, परन्तु राज्य में मात्र लगभग 4.06 लाख क्विं॰ बीज उत्पादन हो रहा है। शेष बीज अन्य राज्यों से लाकर किसानों के बीच बिक्री किया जा रहा है, जिसके कारण हमारे किसान कभी-कभी गुणवत्ता के मामले में छले जातें हैं। गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन में बिहार राज्य बीज निगम एवं बसोका का महत्वपूर्ण भूमिका है। बिहार राज्य बीज निगम द्वारा बीज उत्पादन क्षेत्र में कार्यान्वित किये जा रहे मिशन 4.0 अन्तर्गत विभिन्न फसलांे के बीज उत्पादन निर्धारित लक्ष्य 4.00 लाख क्ंिव॰ के विरूद्ध उपलब्धि 3.06 लाख क्ंिव॰ प्राप्त कर ली गई है। वर्तमान में बिहार राज्य बीज निगम की प्रसंस्करण क्षमता 8.30 लाख क्ंिव॰ प्रतिवर्ष की है। विभाग राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र तथा बिहार राज्य बीज निगम को सुदृढ़ीकरण करते हुये आवश्यकता अनुरूप बीज का उत्पादन कराने का निर्णय लिया है।

कुमार सर्वजीत ने कहा कि जैसा की आप जानते हैं कि चतुर्थ कृषि रोड-मैप की तैयारी चल रही है। चतुर्थ कृषि रोड-मैप में भी बीज को एक मुख्य अवयव मानते हुए बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता के सपनों को साकार करने की आवश्यकता है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि सचिव, कृषि विभाग के नेतृत्व में बिहार बीज उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर होगा। बसोका के डी॰एन॰ए॰ फिंगर प्रिटिंग प्रयोगशाला का उपयोग करते हुये राज्य के बाहर से आने वाले बीजों का अनुवांशिक जाँच कराकर उसकी शुद्धता भी किसानों के बीच सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि हमारे किसान नकली बीज के उपयोग से बच सकें।

उन्होंने कहा कि बसोका को बीज की गुणवत्ता में पूर्ण रूप से केंद्रित होना होगा ताकि गुणवत्तायुक्त बीज का उत्पादन हो सके। राज्य के किसानों को बीज उत्पादन की कड़ी में लाने हेतु उन्हें सामान्य बाजार मूल्य से अधिक मूल्य मिले ताकि वे बीज उत्पादन कर उसे बाजार में नहीं बेचकर बल्कि बिहार राज्य बीज निगम को बेच सकें। दलहनी एवं तेलहनी फसलों के बीजों की उत्पादन बिहार में काफी कम है, जो आवश्यकता के लगभग मात्र 5 प्रतिशत की उपलब्धता है। इन दोनों फसलों के बीजो के उत्पादन में वृद्धि हेतु यदि किसानों को विशेष सहायता देने की आवश्यकता हो तो उन्हे दिया जाना चाहिये, ताकि अधिक-से-अधिक किसान दलहनी एवं तेलहनी फसलों के बीजों के उत्पादन की कड़ी में जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन से राज्य के छोटे-छोटे किसानों को भी जोड़ने की आवश्कता है। इन किसानों को आकर्षित करने हेतु विभाग को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए, ताकि इन छोटे-छोटे किसानों की आमदनी भी बढे़गी तथा हम बीज उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी होंगें।

डाॅ॰ एन॰ विजयालक्ष्मी, संयुक्त सचिव (बीज), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्ष 2023 अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज के रूप में मनाया जायेगा। बिहार में कृषि विविधिकरण में पोषक अनाज का एक अपना महत्व है। कृषि में बीज उत्पादन के लिए पहले से रणनीति बनाने होती है, गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन से फसल की उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है। उन्होंने भारत सरकार से बीज के प्रसंस्करण एवं भण्डार के केन्द्रीय योजनाओं में हर संभव सहायता का आशवासन दिया।

डाॅ॰ एन॰ सरवण कुमार, सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना ने कहा कि क्षेत्र विशेष के अनुसार बीज उत्पादन करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बीज एवं जैविक प्रमाणन का कार्य बसोका द्वारा बहुत ही सराहनीय तरीके से किया जा रहा है। बसोका द्वारा राज्य के अंदर जैविक प्रमाणन लगभग 17 हजार एकड़ में किया गया है, जबकि राज्य के बाहर 07 अन्य राज्यों में भी जैविक प्रमाणन का कार्य किया जा रहा है। बिहार राज्य बीज निगम से संबंध किसानों तथा नीजी क्षेत्र के बीज उत्पादकों को राज्य के अंदर बीज के विक्रय करने से उत्पादकता में वृद्धि होगी।
कर्मशाला में आये बीज उत्पादक किसानों, नीजी कम्पनियों के प्रतिनिधियों तथा अनुमण्डल कृषि पदाधिकारियों ने गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के लिए सुझाव तथा समस्याओं के बारे में विस्तार पर्वूक चर्चा की।

इस अवसर पर कृषि निदेशक-सह-प्रबंधक निदेशक, बिहार राज्य बीज निगम लि॰ डाॅ॰ आदित्य प्रकाश, निदेशक, बसोका सुनिल कुमार पंकज, उप निदेशक (शष्य), बीज, मनोज कुमार, उप निदेशक, बीज निरीक्षण सनत कुमार जयपुरियार, उप निदेशक, बीज विश्लेषण शंकर कुमार झा सहित दोनों विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ एवं पदाधिकारी/कर्मचारी एवं बीज उत्पादक किसान उपस्थित थे।

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