कन्हैया पर राजद्रोह के मुकदमे को लेकर आक्रोशित छात्र, अमित शाह का फूंका पुतला

पटना (जागता हिंदुस्तान) एआईएसएफ नेता कन्हैया कुमार एवं जेएनयू के छात्रों को राजद्रोह के मुकदमे में फंसाने की साजिश, सत्ता प्रायोजित दिल्ली हिंसा एवं संवैधानिक संस्थाओं को कठपुतली बनाए जाने के आरोप को लेकर पटना विश्वविद्यालय के बाहर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। आक्रोशित छात्रों ने एआईएसएफ के बैनर तले पटना विश्वविद्यालय के गेट पर गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका।

पुतला दहन के बाद पीयू गेट पर हुई सभा को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव सुशील कुमार ने कहा कि राजनीतिक षडयंत्र के तहत कन्हैया कुमार एवं अन्य छात्रों को राजद्रोह जैसे काले कानून में फंसाने की साजिश रची जा रही है। एक समय अंग्रेजों ने इसका दुरुपयोग किया तो अब अंग्रेजों के चेले इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। जबकि राजद्रोह जिसे भक्तजन देशद्रोह कह रहे हैं जैसे ब्रिटिश औपनिवेशिक कानून की कोई जरूरत नहीं है। यह वही कानून है जब तिलक को स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार कहने पर लगा तो भगत सिंह एवं महात्मा गांधी पर अंग्रेजों के खिलाफ बोलने पर लगा।

उन्होंने कहा कि दरअसल जन गण मन यात्रा पर पत्थरबाज आरएसएस हमले कराने एवं हर कोशिश करने के बावजूद रोक पाने में विफल हुई। बिहार की जनता के अपार प्यार से सत्ता पक्ष के अतिरिक्त कई नेताओं की लुटिया डुबनी तय लग रही है।इस कारण चौतरफा हमले हो रहे हैं।

राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुशील उमाराज ने कहा कि पार्लियामेंट चुनाव के ठीक पहले तीन साल बाद चार्ज शीट दाखिल किया गया था और अब बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले राजनीतिक दबाव में दिल्ली सरकार के द्वारा मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी गई। देशद्रोह जैसे संगीन आरोप के दोषी वे चंद नकाबपोश कौन हैं यह देश जानना चाहता है। सरकार को अब स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को पकड़ने एवं निर्दोषों को न्याय देने का काम करना चाहिए। इसी के साथ जेएनयू को लम्बे समय से बदनाम करने वालों की मंशा भी एक्सपोज होगी। छात्रों को राजनीतिक षडयंत्र के तहत फंसाने की साजिश जारी है जबकि आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी देवेंद्र सिंह देशद्रोह की जद से बाहर है।

एआईएसएफ के जिलाध्यक्ष अक्षय कुमार ने कहा कि गुजरात मॉडल के आधार पर दिल्ली में दंगा भड़काने की साजिश रची गई। सत्ता प्रायोजित दिल्ली हिंसा के जिम्मेवार गृहमंत्री अमित शाह की कोशिश गुजरात की तरह दंगा भड़काने वाले लोगों को यहां भी बचाने में हीं रही है। यह फासीवादी सरकार दिल्ली हिंसा की सुनवाई करने वाले जज का सुनवाई से पहले हीं ट्रांसफर करा देती है।

सभा को एआईएसएफ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुशील उमाराज, राज्य परिषद सदस्य अफरोज आलम, जिला उपाध्यक्ष मीर सैफ अली, राजश्री रश्मि, कुंदन कुमार, अफजल गनी, पवन कुमार,डॉ. अंकित, शशि कुमार, कुणाल कुमार, आफताब, समीर, नाजिश, आदिल सहित दर्जनों छात्र शामिल रहे।

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