दशरथ मांझी ने प्रेम की परिभाषा को दिया जीवंत रूप- मांझी

पटना (जागता हिंदुस्तान) हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के सरकारी आवास पर पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की 86वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर मांझी ने कहा कि पर्वत पुरुष दशरथ मांझी अपने घर से पहाड़ पार कर खेत में काम करने जाते थे। उनकी पत्नी फगुनिया देवी दोपहर का भोजन और पानी पहाड़ पार कर देने जाती थी । संयोग से एक दिन खाना देने के क्रम में पहाड़ से फिसल गई और नीचे गिर गई और बुरी तरह घायल हो गई और वजीरगंज हॉस्पिटल ले जाने के क्रम में उनकी मृत्यु हो गई। उसी दिन उन्होंने पत्नी के बिछड़ने के गम में उन्होंने प्रण किया कि जब तक पहाड़ को तोड़ेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं। मांझी ने कहा कि आज लोग वैलेंटाइन डे के दिन लव यू लव इलू इलू करते हैं बाद में कुछ दिन के बाद उनका प्रेम ज्यादातर समाप्त हो जाता है। प्यार एक सिर्फ शारीरिक मिलन नहीं। प्यार एक दूसरे के लिए समर्पण है। प्यार वास्तव में क्या चीज होता है मरने से पहले मरने के बाद भी पर्वत पुरुष बाबा दशरथ मांझी उसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने पहाड़ को काटकर प्रेम की परिभाषा को जीवंत रूप दिया। वहीं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीएल वैश्यन्त्री ने पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की जयंती पर उन्हें भारत रत्न दिए जाने तथा पटना में उनकी आदम कद प्रतिमा लगाने की भी मांग की।
इसके साथ ही पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की जयंती के अवसर पर मिलन समारोह कार्यक्रम में लोजपा नेता अरविंद पासवान राजापाकर विधानसभा क्षेत्र के रवि राय सिंह, प्रवीण कुमार, अभिषेक कुमार उर्फ मंटू, चंदन कुमार पासवान ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ हम पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।इस अवसर पर पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उपेंद्र प्रसाद, पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार, राजेश्वर मांझी, देवेंद्र मांझी, महेंद्र सदा, प्रदेश प्रवक्ता विजय यादव, प्रवक्ता रामविलास प्रसाद, मो. मसूद रजा, हेमलता पासवान, सुरेंद्र चौधरी, रमेश चंद्र कपूर, डॉ. धर्मेंद्र प्रफुल्ल चंद्र, बेला यादव, गीता पासवान, अनिल रजक, रविंद्र शास्त्री, रोशन देवी, बलमा बिहारी, रामचंद्र राउत, अमरेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि नेता मौजूद रहे।

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