अगर भूल से जारी हुआ है श्रमिकों को चोर समझने वाला पत्र तो, सीएम नीतीश खुद मांगे माफी- तेजस्वी

पटना (जागता हिंदुस्तान) बिहार की राजनीति पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी और इस बार चुनावी राजनीति के केंद्र में बिहारी श्रमिक हैं। दरअसल लॉकडाउन के कारण विभिन्न राज्यों में फंसे बिहारी श्रमिक लगभग बिहार वापस आ चुके हैं और अब यहां उनके रोजगार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार बाहर से आए सभी श्रमिकों को राज्य में रोजगार देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच 29 मई को बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी एक पत्र ने बड़ा बवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि मामला बिगड़ता देख आनन-फानन में कुछ देर पहले ही पुलिस मुख्यालय ने एक लाइन का दूसरा पत्र जारी कर कहा कि पहला पत्र भूल से जारी कर दिया गया था।

सरकार द्वारा बिहार वापस आये श्रमिकों के संदर्भ में 29 मई को जारी किए गए पत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने जमकर खरी-खोटी सुनाई है। तेजस्वी यादव ने इस पत्र को अमानवीय करार देते हुए कहा कि हम इसका विरोध और 7 जून को इसके खिलाफ प्रतिकार करेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार श्रमिकों को चोर समझते हैं। यही वजह है कि सरकार ने अपने पत्र में कहा है कि श्रमिक यहां आएंगे तो अपराध बढ़ेगा और इसे लेकर कार्यवाही तक की बात कही है। वहीं, नेता प्रतिपक्ष ने आगामी विधानसभा चुनाव की तरफ इशारा करते हुए कहा कि श्रमिक ऐसी सरकार को जवाब दें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा श्रमिकों को रोजगार देने के बयान पर कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा बल्कि नीतीश कुमार यह बताएं कि 30 लाख लोगों को रोजगार देने का उनका क्या रोडमैप है। सरकार इस संबंध में अपनी कार्ययोजना को सार्वजनिक करें ताकि मजदूर को इसकी अद्यतन जानकारी मिल सके।

बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा 29 मई को जारी पत्र ।

तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह बताएं कि उनके 15 वर्षों के शासनकाल में बिहार में कितने नए उद्योग खुले और कितने पुराने उद्योग बंद हो गए। उन्होंने कहा कि बिहार गंभीर दौर से गुजर रहा है। 7 करोड़ लोग पहले से बेरोजगार हैं। बाहर से आए श्रमिकों और उनके परिवारों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 8 से 9 करोड़ हो जाएगा यानी बिहार के लगभग 12 करोड़ की आबादी में 8 से 9 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। तेजस्वी यादव ने सुशासन की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेरे सवाल जायज है और इसमें कोई राजनीति नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन को लेकर लगातार किए जा रहे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रवचन नहीं सुनाएं बल्कि कार्य योजना बताएं। तेजस्वी यादव ने एक बार फिर दोहराया कि सरकार अगर विपक्ष की राय मानेगी तो मौजूदा समस्या से निपट सकते हैं।

मांग:-

  1. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लॉक डाउन के कारण श्रमिक 100 दिन यानी 3 महीने बेरोजगार रहे हैं और आगे भी 100 दिन रोजगार की कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कुल 200 दिन यानी 6 महीने के लिए श्रमिकों को ₹10000 नगद राशि भत्ता मुहैया कराए और यह राशि एकमुश्त दी जाए। उन्होंने बताया कि इसमें कुल 4000 करोड़ रुपए का बजट आएगा जबकि सरकार ने जल जीवन हरियाली अभियान के लिए 24000 करोड़ रुपये का बजट बनाया है।
  2. जब महागठबंधन सरकार थी तब बिहार विकास मिशन के अंतर्गत शुरुआती तौर पर प्रदेश के 65 लाख बेरोज़गारों को बेरोज़गारी भत्ता देने की योजना थी लेकिन बीजेपी के साथ जाते ही मुख्यमंत्री वह भुल गए। हमारी माँग है कि इस गंभीर संकट में सभी बेरोज़गारों को बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए।
  3. जिलावार रोजगार कैंप लगाकर श्रमिकों को उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
  4. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस उत्पन्न संकट को लेकर सरकार विशेष सत्र बुलाए।

तेजस्वी यादव ने कहा कि विशेष सत्र में सरकार गैरजरूरी योजनाओं को बंद कर इन पैसों को रोजगार सृजन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगाए। उन्होंने सरकार द्वारा किए जा रहे खर्च पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह खर्च कहां हो रहे हैं जमीन पर तो कुछ भी नहीं दिख रहा। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले में नीतीश सरकार पर घोटाले का भी आरोप लगाया है।

खास बात यह है कि पूरे कांफ्रेंस के दौरान पहली बार तेजस्वी यादव बेहद गुस्से में नजर आए। आवेश में उन्होंने पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी 29 मई के पत्र की प्रति को भी फाड़ डाला। अपने गुस्से को लेकर उन्होंने कहा कि अगर इंसानियत है तो गुस्सा जरूर आएगा। वहीं पुलिस मुख्यालय द्वारा पत्र को भूलवश जारी करने के मामले पर तेजस्वी यादव ने कहा की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद इस मामले पर बिहार के लोगों से माफी मांगे। उन्होंने कहा कि अगर यह भूल था तो इसे सुधारने में लगभग 1 हफ्ते का समय कैसे लग गया? कैसे यादव ने सीधे तौर पर कहा कि यह लोग चुनाव की चिंता करें और हम गरीबों के साथ खड़े होकर प्रतिकार करेंगे।

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