क्वारंटाइन सेंटरों पर लोगों को उकसाकर अव्यवस्था फैलायी जाती है, ताकि नकारात्मक खबरें छप सके- सचिव सूचना

पटना (जागता हिंदुस्तान) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर सचिव सूचना एवं जन-सम्पर्क अनुपम कुमार, सचिव स्वास्थ्य लोकेश कुमार सिंह एवं अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्यालय जितेन्द्र कुमार ने कोरोना संक्रमण से उत्पन्न हालात को लेकर सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों के सम्बन्ध में अद्यतन जानकारी दी।

सचिव सूचना एवं जन-संपर्क अनुपम कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण की अद्यतन स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री के स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है और लोगों को सहायता प्रदान करने के लिये सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिहार के सभी प्रखंड एवं पंचायत स्तरीय क्वारंटाइन सेंटर पर गुणवत्तापूर्ण भोजन, आवासन एवं चिकित्सकीय सुविधा की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है। क्वारंटाइन सेंटर पर आवासित लोगों से फीडबैक लेकर आवश्यकतानुरूप बेहतर सुविधाओं का प्रबंध किया जा रहा है। क्वारंटाइन सेंटर पर लोगों को हर प्रकार की सहूलियत प्रदान करने के लिए सभी अधिकारी पूरी मुश्तैदी से लगे हुए हैं। हम सभी को यह बात समझनी होगी कि कोरोना संक्रमण से बचाव में क्वारंटाइन ही सबसे अच्छा उपाय है। कुछ जगहों पर निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा क्वारंटाइन सेंटरों पर कुछ लोगों को उकसाकर जान-बूझकर अव्यवस्था फैलायी जाती है ताकि नकारात्मक खबरें छप सके। यहाॅ सोचने वाली बात यह है कि क्वारंटाइन सेंटर में लोगों को रखने में सरकार का क्या स्वार्थ हो सकता है ? बाहर से आए लोगों को क्वारंटाइन सेंटर में रखने की क्या जरुरत है ? इसमें सरकार का क्या फायदा है ? सबसे आसान कार्य है लोगों को घर छोड़ देना और इसमें सरकार को अपने स्तर से कुछ करने की जरूरत भी नहीं पड़ती लेकिन प्रवासी मजदूरों के अपने-अपने गांव जाकर घर में रहने से उनका पूरा परिवार और समाज संक्रमित हो जायेगा और इससे इन्फेक्शन काफी बड़े पैमाने पर फैल जाएगा। यद्यपि यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है तथापि लोगों, उनके परिवारों तथा पूरे समाज के हित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसे कार्यान्वित किया जा रहा है। देयर इज एन इजी वे आउट कि लोगों को सीधे घर भेज दिया जाय किंतु सरकार का उद्देष्य लोगों को इस कोरोना संक्रमण से बचाना है और इसके फैलने से रोकना है। सरकार द्वारा यदि आसान रास्ता अपनाया गया तो हम सबलोग परेशानी में पड़ेंगे और बाद में इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ? अतः हम सभी को सहयोग करना चाहिए। हम यह नहीं भूलें कि मूलतः हम सब कोरोना संक्रमण से लड़ रहे हैं और यही महत्वपूर्ण बात है। अस्थायी परेशानियों के कारण हम बड़े संकट को नजरअंदाज नहीं कर सकते। कुछ समस्याएं तो होंगी पर उनका लगातार समाधान भी किया जा रहा है तथा हमारे अधिकारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि लोग आश्वस्त रहें, सरकार उनके हित में बेस्ट पॉसिबल कदम उठा रही है। उक्त बातों पर गहराई से विचार करते हुये यह वक्त बिना मीन मेख निकाले संवेदनशीलता के साथ एकजुट होकर सहयोग करने का है, तभी हम सब इस महामारी पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।
श्री अनुपम कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकार पूरी तत्परता के साथ इच्छुक लोगों को बिहार लाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि आपदा राहत केन्द्रों की संख्या 151 है, जिस पर 76,500 लोग लाभ उठा रहे हैं। ब्लॉक क्वारंटाइन केन्द्रों की संख्या बढ़कर 7,840 हो गई है, जिसमें 5 लाख 45 हजार लोग आवासित हैं। प्रवासी श्रमिकों के आने का सिलसिला बढ़ने से संक्रमण का प्रतिशत भी बढ़ा है। बाहर से आने वाले लोग क्वारंटाइन सेंटर की बजाय सीधे यदि अपने घर चले जाए तो संक्रमण फैल सकता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना अंतर्गत बाहर फंसे 20 लाख 3 हजार 318 लोगों के खाते में 1,000 रूपये की राशि भेज दी गयी है। अधिक से अधिक रोजगार सृजन हो, इसके लिए हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। रोजगार सृजन के लिए 4 लाख 11 हजार योजनायें फंक्शनल हैं और अब तक 2 करोड़ 52 लाख से ज्यादा मानव दिवस सृजित किये जा चुके हैं। 8 लाख 7 हजार राशन कार्ड विहीन परिवारों के नये राशन कार्ड बनाये जा चुके हैं। असामयिक वर्षापात और ओलावृष्टि के कारण फरवरी, मार्च और अप्रैल में हुए फसल क्षति को ध्यान में रखते हुए कृषि इनपुट अनुदान के तहत कुल 730 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गयी है। इसमें फरवरी माह के लिए 60 करोड़ रूपये की स्वीकृत राशि से 45 करोड़ 66 लाख रूपये 6 लाख 99 हजार किसानों के खाते में अंतरित कर दी गयी है। मार्च महीने के लिए 518.42 करोड़ रूपये की स्वीकृत राशि से 255 करोड़ 86 लाख रूपये, 6 लाख 99 हजार किसानों के खाते में भेजी जा चुकी है। वही अप्रैल माह में हुई फसल क्षति के लिए 151.53 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। कृषि इनपुट अनुदान वितरित करने की प्रक्रिया जारी है और इसमें काफी गति लायी गयी है। बाहर से इच्छुक लोगों को जल्द से जल्द बिहार लाने के लिए अधिक से अधिक ट्रेनों की स्वीकृति दी जा रही है और आज 60 ट्रेनें चल रही हैं जिसमे से कुछ ट्रेनों का परिचालन बोर्डर इलाके से किया जा रहा है जबकि शेष बाहर से आ रही है। कल के लिए 66 ट्रेनें शिड्यूल्ड हैं। प्रवासी श्रमिकों को यथाशीघ्र बिहार लाने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश में जुटी है।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि अब तक कुल 50,563 जांच की गयी है, जिसमे कोविड -19 के 1495 पॉजिटिव मामले मिले हैं। इस प्रकार 2.95 प्रतिषत व्यक्ति पॉजिटिव पाए गए हैं। पिछले 24 घंटे में 2007 सैम्पल की जांच में 116 व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। वही पिछले 24 घंटे में 40 व्यक्ति ठीक हो कर घर जा चुके हैं। अब तक 534 लोग स्वस्थ हुए हैं। अब तक 14,910 प्रवासी व्यक्तियों की जांच में 753 व्यक्ति पॉजिटिव मिले हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जांच की क्षमता बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा हैं। अब 14 जगहों पर जांच की जा रही है। आरटीपीसीआर जांच पूर्व की भांति आरएमआरआई, आईजीआईएमएस, एम्स, पीएमसीएच, एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर, और डीएमसीएच में कुल छह जगह हो रहा हैं। इसके अलावा भागलपुर मेडिकल कालेज में सीबी नेट मशीन से जांच हो रही है। मेडिकल कालेज एंड अस्पताल पावापुरी, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कालेज एवं अस्पताल गया, सीवान मेडिकल कॉलेज, बेतिया मेडिकल कालेज, मधेपुरा मेडिकल कालेज, मुंगेर जिला अस्पताल और मोतिहारी जिला अस्पताल जैसे 7 जगहों पर ट्रूनेट मशीन से जांच की जा रही हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 14 जगहों पर जांच की जा रही है। पूरे बिहार में 198 कन्टेनमेंट जोन हैं जिसमे 1764 टोला/वार्ड शामिल हैं और करीब 7 लाख 35 हजार घर इन कन्टेनमेंट जोन के अंदर हैं।

अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस मुख्यालय जितेन्द्र कुमार ने बताया कि लॉकडाउन का सख्ती से अनुपालन कराया जा रहा है। अब तक कुल 2,114 एफआईआर दर्ज की गयी है और 2,259 लोगों की गिरफ्तारियां हुयी हैं। 74,453 वाहन जब्त किये गये हैं। अब तक इससे कुल 17 करोड़ 32 लाख 57 हजार 636 रूपये की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की गयी है। पिछले 24 घंटे में अवरोध पैदा करने के कारण 24 एफ0आई0आर0 दर्ज की गयी हैं और 42 लोगों की गिरफ्तारियां हुयी हैं। 1,445 वाहन जब्त किये गये हैं और 33 लाख 73 हजार 100 रूपये जुर्माने के रूप में वसूल किये गये हैं। कोविड-19 से निपटने के लिये उठाये जा रहे कदमों और लॉकडाउन का पालन करने में अवरोध पैदा करने वालों के खिलाफ सख्ती से कदम उठाये जा रहे हैं।

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