मखाना महोत्सव-सह-राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ उद्घाटन, बोले कृषि मंत्री- बिहार सरकार ने उठाया सराहनीय कदम
पटना । कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत द्वारा ज्ञान भवन, गाँधी मैदान, पटना में 29 से 30 नवम्बर तक आयोजित दो दिवसीय मखाना महोत्सव-सह-राष्ट्रीय सम्मेलन, 2022 का उद्घाटन किया गया। साथ ही, उन्होंने बिहार मखाना ऐट ए ग्लांस नामक पुस्तिका का विमोचन भी किया।
कृषि मंत्री ने इस कार्यक्रम में अपने सम्बोधन में कहा कि बिहार दुनिया में मखाना का शीर्ष उत्पादक है। देश में उत्पादित होने वाले मखाना का लगभग 90 प्रतिशत उत्पादन बिहार में होता है। बिहार में विगत एक दशक में मखाना क्षेत्र विस्तार में व्यापक वृद्धि दर्ज की गयी है। मखाना क्षेत्र में लगभग 171 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ वर्तमान में 35 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में मखाना का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं पॉप मखाना का उत्पादन वर्ष 2012-13 में 9,360 टन था, जो बढ़कर वर्तमान समय में लगभग 23.50 हजार टन हो गया है। बिहार के उत्तरी भाग में प्राकृतिक और मानव निर्मित जल निकायों की प्रचुरता के कारण, बिहार के आठ जिलों में व्यापक रूप से मखाना की खेती की जाती है, साथ ही, राज्य में मखाना उत्पादन क्षेत्र के विस्तार के लिए एक आशाजनक अवसर भी है। इस दिशा में बिहार सरकार ने सराहनीय कदम उठाया है।
कृषि विभाग द्वारा चलायी जा रही मखाना विकास योजना के तहत बिहार के 8 जिलों कटिहार, दरभंगा, सुपौल, किशनगंज, पूर्णियाँ, सहरसा, अररिया और पश्चिमी चंपारण में किसानों को मखाना की खेती के लिए 75 प्रतिशत अनुदान दी जा रही है। मंत्री ने कहा कि पूरे भारत में बिहार के मखाना के विशिष्ट पहचान के लिए मिथिला मखाना के नाम से जी॰आई॰ टैग दिया गया है। बिहार सरकार द्वारा मखाना महोत्सव-सह-राष्ट्रीय सम्मेलन, 2022 का आयोजन किया जा रहा है। यह बिहार के मखाना को पहचान देने की सरकार द्वारा की जा रही एक नयी पहल है।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रगतिशील उत्पादकों, खरीदारों और निर्यातकों को एक साझा मंच पर लाने के साथ-साथ मखाना की बढ़ती निर्यात क्षमता के बारे में जानकारी प्रदान करना है। साथ ही, मखाना उत्पाद से संबंधित विकसित नई तकनीक का प्रदर्शन, मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी सत्र और मखाना क्षेत्र के विकास की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रगतिशील कदम को भी साझा किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एपीडा की मदद से राज्य के लिए निर्यात की सम्भावनाओं का विस्तार करने और मखाना एवं इसके मूल्यवर्द्धित उत्पादों को निर्यातकों के साथ संपर्क स्थापित करके कई निर्यात स्थानों तक ले जाने में मदद करेगा। एपीडा, निर्यात व्यापार संवर्द्धन के लिए भारत सरकार की शीर्ष निकाय है।
उन्होंने कहा कि इस महोत्सव में मखाना और मखाना आधारित उत्पादों से संबंधित संस्थानों द्वारा भाग लिया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आये निर्यातक, अनुसंधान संस्थान, प्रोसेसर, आदि भाग ले रहे हैं। महोत्सव में कई कंपनियों एवं संस्थानों द्वारा 30 स्टॉल भी लगाए गए हैं, जहाँ पर मखाना और मखाना के मूल्य वर्द्धित उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि राज्य में कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए बिहार कृषि निवेश प्रोत्साहन नीति (बी॰ए॰आई॰पी॰पी॰) के तहत कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा एक अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।
इस नीति के अंतर्गत चिन्हित फसल मखाना, शहद, मक्का, चाय, फल एवं सब्जी, मखाना, बीज, औषधीय एवं सुगंधीय पौधे के प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्यसम्वर्द्धन और निर्यात में वृद्धि का भी समर्थन करता है, जिससे किसानों को उचित आय प्राप्त करने में और अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल रही है। इस योजना के प्रावधानों के तहत सरकार राज्य में कृषि आधारित उद्योगों की स्थापना और विकास के लिए क्रेडिट लिंक्ड पूंजीगत का प्रावधान किया गया है।
कुमार सर्वजीत ने बताया कि महोत्सव के दूसरे दिन क्रेता-विक्रेता बैठक का आयोजन किया जायेगा, जिसमें फ्लिपकार्ट, रिलायंस रिटेल, बिग बास्केट और देहात जैसे खरीदारों और 200 से अधिक विक्रेता हिस्सा लेंगे। इसके साथ ही, मखाना एवं मखाना संबंधित उत्पादों के ऊपर तकनीकी सत्र का भी आयोजन किया जायेगा, जिसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों भारतीय पैकेजिंग संस्थान, मुंबई भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई, भोला पासवान शास्त्री कृषि विश्वविद्यालय, पूर्णियाँ, मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा से आये पदाधिकारीगण, मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मखाना के ब्रांडिंग के लिए भारत के सभी एयरपोर्ट पर मखाना बेचने का प्रयास किया जायेगा। आज 07 कृषक उत्पादक समूहों को निर्यात के लिए अनुज्ञप्ति दी गई इै, मुझे भरोसा है कि अगले वर्ष यह संख्या 100 से अधिक होगी। उन्होंने कृषि विभाग के सचिव सहित सभी पदाधिकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि जो इंसान कोशिश करता है, वह पीछे मुड़कर नहीं देखता है।
सचिव, कृषि विभाग, बिहार डाॅ॰ एन॰ सरवण कुमार ने कहा कि मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए प्रत्येक वर्ष मखाना दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2022 मखाना के लिए मिल का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इसी साल मखाना को बिहार कृषि विश्वविद्यालय के भोला पासवान शास्त्री, कृषि महाविद्यालय के वैज्ञानिकों के अथक प्रयास से भौगौलिक सूचकांक (जी॰आई॰ टैग) में प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मखाना की खेती को सुलभ करना, मखाना की गुंड़ी को फोड़ने के मशीनों को बढ़ावा तथा इसके विपणन के कार्याें पर विशेष बल दिया जायेगा। मखाना में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है और वसा की मात्रा बहुत कम होती है, इसलिए खिलाड़ियों से लेकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में मखाना काफी लोकप्रिय है। आज 07 कृषि उत्पादक कम्पनियों को एपीडा के सहयोग से सीधे निर्यात के लिए अनुज्ञप्ति दिया गया है। इससे कृषक उत्पादक कम्पनियाँ स्वयं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद बेच सकेंगे।
लुलु समूह जिनका पूरे विश्व में 250 से ज्यादा साॅपिंग माॅल तथा सुपर मार्केट है, के प्रतिनिधि ने बिहार में मखाना सहित जी॰आई॰ टैग प्राप्त उत्पादों के निर्यात की सम्भावना तलाश कर उनसे जुड़े कृषक उत्पादक कम्पनियों से उत्पाद खरीदने के लिए अपनी इच्छा जताई।
इस अवसर पर विशेष सचिव, कृषि विभाग रवीन्द्र नाथ राय एवं बिजय कुमार, उद्यान निदेशक नन्द किशोर, एपीडा के क्षेत्रीय प्रमुख डाॅ॰ सी॰बी॰ सिंह, भारतीय पैंकेजिंग संस्थान के निदेशक डाॅ॰ ननवीर आलम, अपर निदेशक (शष्य) धनंजयपति त्रिपाठी, निदेशक, बामेती आभांशु सी॰ जैन, अन्य विभागीय पदाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में किसानगण एवं दर्शक मौजूद थे। साथ ही, इस कार्यक्रम में दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से निर्यातकगण भाग ले रहे हैं।
