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मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी में बोले CM नीतीश- बिहार में लागू नहीं होने वाला NRC

दरभंगा (जागता हिंदुस्तान) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड स्थित मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय, चंदनपट्टी के प्रांगण में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत वाली अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं का रिमोट के माध्यम से शिलापट्ट का अनावरण कर शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री कौन शिलान्यास की गई योजनाओं में मदरसा सुदृढ़ीकरण योजनानर्गत मदरसा रहमानिया अफजला, प्रखण्ड- बिरौल में 100 शैय्या वाले छात्रावास का निर्माण, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय दरभंगा में 100 शैय्या वाले बालिका छात्रावास तथा 100 शैय्या वाले बालक छात्रावास, वक्फ की भूमि पर जी प्लस थ्री बहुद्देश्यीय भवन एवं 560 आवासन क्षमता वाले अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का भवन निर्माण शामिल है। शिलान्यास समारोह का शुभारंभ कुरान शरीफ के तिलावत से किया गया। मुख्यमंत्री ने सहायक प्रो. डॉ. मुजफ्फर इस्लाम की पुस्तक ‘स्टडी ऑफ मदरसा एडुकेशन इन बिहार’ का विमोचन किया।

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय परिसर में जिला प्रशासन द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं से संबंधित स्टॉल एवं मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा जल-जीवन-हरियाली अभियान पर आधारित लगायी गयी प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। प्रदर्शनी अवलोकन के क्रम में मुख्यमंत्री ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना, मुख्यमंत्री श्रमशक्ति कौशल विकास योजना का देयलाभ एवं मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक ऋण रोजगार योजना का चेक मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं को प्रदान किया।
हेलीपैड पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों एवं मौलाना आजाद नेशनल विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों ने पुष्प-गुच्छ भेंटकर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। समारोह को लेकर बने मंच पर पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मो. अली अशरफ फातमी, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मो. असलम परवेज ने टोपी, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के स्वागत में छात्रा यूसुफ ने नज्म पढ़ी।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मो. अली अशरफ फातमी को इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि फातमी साहब जब केंद्र में मंत्री थे उसी दौरान यहां मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कैम्प्स का निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी, जो मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम पर है। देश की आजादी और शिक्षा के विकास में मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसे कभी भुलाया नही जा सकता। आजाद साहब के जन्मदिन को वर्ष 2007 से ही हमलोगों ने शिक्षा दिवस के रूप में मनाना शुरू किया, जिसके अगले वर्ष 2008 से ही केंद्रीय स्तर पर उनके जन्म दिवस को शिक्षा दिवस के रुप मे मनाया जाने लगा। वे देश के विभाजन के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने ही मुस्लिम समुदाय के लोगों को विभाजन के वक्त यहां रहने के लिए प्रेरित किया था इसलिए बापू की तरह ही इस मुल्क में मौलाना अबुल कलाम आजाद साहब को भी याद रखना चाहिए। शिक्षा विभाग द्वारा उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित पुस्तक तैयार की गई है, जिसका पठन-पाठन विद्यालयों में कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण उभरे पर्यावरण संकट को देखते हुए पिछले वर्ष जुलाई माह में बिहार विधानमंडल के सदस्यों की संयुक्त बैठक में जल-जीवन-हरियाली अभियान चलाने का निर्णय लिया गया, जिसके 11 अवयव हैं। इन 11 अवयवों में जल संरक्षण, हरियाली, सौर ऊर्जा के प्रति लोगों को प्रेरित करते हुए निरंतर अभियान को चलाना है। इसमें 24 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च होगा। हमने पूरे बिहार की यात्रा कर लोगों को इस अभियान के प्रति जागरूक किया, जिसका परिणाम मानव श्रृंखला में इस वर्ष 19 जनवरी 2020 को देखने को मिला। 18 हजार किलोमीटर से अधिक लम्बी मानव श्रृंखला में 5 करोड़ 18 लाख से भी ज्यादा लोग शामिल हुये और जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रति अपने संकल्प का प्रकटीकरण किया। आज यहां छात्र-छात्राओं ने भी प्रदर्शनी में बहुत ही बेहतर तरीके से इस अभियान के उद्देश्यों को प्रदर्शित किया है। हर महीने के पहले मंगलवार को सभी विद्यालयों एवं सरकारी कार्यालयों में जल-जीवन-हरियाली अभियान पर चर्चा होगी ताकि अधिक से अधिक लोगों में जागृति आ सके।

मुख्यमंत्री ने मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति से कहा कि इस संस्थान का और विस्तार करिए, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को कह दिया गया है, इसके लिए राज्य सरकार जमीन मुहैया कराएगी। सुबहानी साहब जमीन जल्द से जल्द मुहैया कराइये ताकि हमलोग उसका शिलान्यास कर सकें। बिहार में पहले 12.5 प्रतिशत बच्चें स्कूलों से बाहर थे, जिनमें अधिकांश बच्चें अल्पसंख्यक और दलित-महादलित समुदाय से थें, उन्हें स्कूलों तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल किया गया जिसका परिणाम है कि अब एक प्रतिशत से भी कम बच्चें स्कूलों से बाहर हैं। शिक्षा के प्रति अधिक से अधिक लड़कियों को आकर्षित करने के लिए साईकिल योजना के बाद पोशाक योजना चलाया गया जिसका नतीजा आज यह है कि हाई स्कूल में लड़कियों की संख्या लड़कों के बराबर हो गई है। उन्होंने कहा कि पहले मांग करने पर मदरसा शिक्षकों की पिटाई होती थी लेकिन हमलोगों ने सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद जो लाभ अन्य शिक्षकों को दे रहे हैं वही लाभ मदरसा के पुराने शिक्षकों को और बाकी शिक्षकों को नियोजित शिक्षकों का पे-स्केल देने का निर्णय लिया है। न्याय के साथ विकास का काम करते हुए हमलोगों ने विशेष पहल कर हाशिये पर खड़े सभी तबके के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। राज्य सरकार ने सभी जिलों में बिहार राज्य अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय का निर्माण कराने का निर्णय लिया है, जिसका आज यहां शिलान्यास भी हुआ है। आपकी सेवा करना ही हमारा धर्म है। समाज मे प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का माहौल हर सूरत-ए-हाल में कायम रहना चाहिये। इसके लिए हमारी सरकार काम कर रही है। बिहार का विकास दर 11.3 प्रतिशत है जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है लेकिन हम इतने से ही संतुष्ट नही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय योजना अंतर्गत हर घर नल का जल और हर घर तक पक्की गली और नाली निर्माण का काम हमलोग इसी वर्ष पूरा कर देंगे। हर इच्छुक परिवार तक बिजली पहुंचाने के बाद पूरे राज्य में जर्जर बिजली के तार को बदल दिया गया है। बिहार में पहले 700 मेगावाट बिजली की खपत नही हो पाती थी जो अब बढ़कर 5.5 हजार मेगावाट से भी अधिक हो गयी है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। आज बिहार पुलिस में महिलाओं की जितनी संख्या है, उतना किसी भी दूसरे राज्य के पुलिस बल में महिलाओं की संख्या नही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 में बाढ़ आई जिसमे 22 जिले के 2.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे। उस समय हमलोगों ने प्रभावित परिवारों को एक-एक क्विंटल अनाज दिया था। उस समय जब हम मिथिला इलाके में आएं तो यहां के लोगों ने हमें क्विंटलिया बाबा कहना शुरू कर दिया था। हम दरभंगा को कभी भूल नही सकते। इस धरती की विशेष खासियत है। विकास के साथ-साथ हमने समाज सुधार की दिशा में भी काम किया है। शराबबंदी के बाद बाल विवाह और दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। शराबबंदी से महिलाओं को काफी फायदा पहुंचा है। वर्ष 2018 में जारी विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में होने वाली मौतों में 5.3 प्रतिशत (30 लाख) मौतें शराब के कारण हुआ करती है। 20 से 39 वर्ष के आयुवर्ग के युवाओं की होनेवाली मौतों में 13.5 प्रतिशत युवाओं की मौत शराब के कारण हो होती है। चंद लोग शराबबंदी के कारण हमसे नाराज हैं और गड़बड़ी करने की कोशिश में जुटे हैं, ऐसे लोगों से सचेत रहने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां एनआरसी लागू नही होनेवाला है और जो एनपीआर होगा वह वर्ष 2010 में जो हुआ है, उसी के आधार पर होना चाहिए। समारोह में शामिल लोगों से आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एकता के साथ सबको जोड़कर चलिये, बिहार देश मे उदाहरण बनेगा। उन्होंने कहा कि हर घर नल का जल, हर घर बिजली, जीविका समूहों का गठन जैसी योजनाओं के साथ ही रिटायर्ड आर्मी के जवानों को बिहार में सैप के रूप में बहाल किये जाने के निर्णय को केंद्रीय स्तर पर लागू किया गया है। यही नहीं बिहार के लोक सेवा कानून को कई राज्यों ने अपनाया है और लोक शिकायत निवारण कानून को भी कई राज्य अपनाने जा रहे हैं। इसके अलावा कई राज्यों में शराबबंदी की भी चर्चा हो रही है इसलिए बिहार में शांति एवं सद्भाव का माहौल कायम रहे, इसके लिए हर व्यक्ति को प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मिथिला आगे बढ़ेगा तभी बिहार आगे बढ़ेगा।

समारोह को योजना एवं विकास विभाग सह दरभंगा जिले के प्रभारी मंत्री महेश्वर हजारी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद आलम उर्फ फिरोज अहमद, जल संसाधन मंत्री संजय झा, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री मदन सहनी, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री मो. अली अशरफ फातमी, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मो. असलम परवेज, बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मो. फैज अहमद ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक संजय सरावगी, विधायक शशिभूषण हजारी, विधायक जीवेश कुमार, विधायक फराज फातमी, विधायक सुनील चौधरी, विधान पार्षद दिलीप कुमार चौधरी, विधान पार्षद तनवीर अख्तर, विधान पार्षद अर्जुन सहनी, विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह, बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्रो. यूनुस हुसैन हकीम, बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जनाब इर्शादुल्ला, बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष इरशाद अली आजाद, बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अब्दुल कयूम अंसारी, हाजी इलियास हुसैन उर्फ सोनू बाबू, पूर्व विधायक इजहार अहमद, दरभंगा के प्रमंडल आयुक्त मयंक बड़बड़े, आईजी दरभंगा गणेश कुमार, जिलाधिकारी दरभंगा त्यागराजन एसएन, पुलिस अधीक्षक दरभंगा बाबूराम सहित मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसरगण, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

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