20 लाख करोड़ के पैकेज में सिर्फ पूंजीपतियों के विकास की बात- ललित सिंह

पटना (जागता हिन्दुस्तान) वंचित समाज पार्टी के चुनाव अभियान समिति के चेयरमैन ललित सिंह ने कहा कि बिहार में प्रवासी मजदूरों की लगातार आने से जहां एक तरफ कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं इन मजदूरों के भविष्य के लिए अभी तक कोई ठोस योजना की घोषणा नहीं की गई। यदि इन प्रवासी मजदूरों को सही ढंग से काम नहीं दिया गया तो स्थिति बद से बदतर हो जाएगी।

सिंह ने कहा कि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 20 लाख करोड़ का पैकेज की घोषणा की गई है, उसमें भी सिर्फ पूंजीपतियों के विकास के लिए बात की गई है जबकि मजदूरों के लिए बड़े पैमाने पर काम और रोजगार की व्यवस्था करनी चाहिए थी परंतु ऐसा कुछ नहीं किया गया है।

ललित सिंह ने कहा कि बिहार में कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग का जाल बिछाना होगा। बिहार में आलू, गेहूं, धान, केला, सब्जी इत्यादि की खेती बहुत ही बड़े पैमाने पर की जाती है। मक्का की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है । बड़ी-बड़ी मंडियों, जिसमें गुलाब बाग के मंडी है, जहां से लाखों टन मक्का बिहार से बाहर भेज दिया जाता है। बिहार में पैदा होने वाले अनाज से फैक्ट्री के द्वारा बहुत ही सामानों का निर्माण किया जा सकता है, जैसे मक्का से बहुत सी चीजें बनाई जा सकती हैं जो बाहर से आयात किया जा रहा है जिसमें मुख्य रूप से कॉर्न फ्लेक्स, बच्चों का खाने का अन्य समान इसके साथ ही आलू से विभिन्न तरह का चिप्स बनाया जा सकता है जिसका आयात बाहर से किया जाता है।

उन्होंने कहा कि उसी प्रकार बांसों से भी बहुत से चीजों का निर्माण किया जा सकता है। इस उद्योग की स्थापना बिहार में की जा सकती है और यहां से बाहर जाने वाले कच्चा माल से वस्तु तैयार की जा सकती है जिसकी खपत बिहार के साथ साथ बाहर भी भेज कर कराया जा सकता है। इससे मजदूरों के रोजगार के लिए एक ठोस कार्रवाई हो सकती है परंतु ऐसा लगता है कि मजदूर को अपने हाल पर मजबूरी में रहने के लिए छोड़ दिया गया है। सरकार से मेरा अनुरोध होगा की बिहार में उपज होने वाले कच्चे माल से जो जो सामान बनाया जा सकता है उसके लिए कारखाना लगा कर मजदूरों को काम दे और वह बिहार में ही रह कर अपने जीवन आपन कर सके। यदि ऐसा नहीं होता है तो कोरोना से कम भूख से ज्यादा गरीब मर जाएंगे।

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