परीक्षा लेने के UGC गाइडलाइन एवं कई महत्वपूर्ण चैप्टर हटाने पर AISF ने जताया रोष

पटना (जागता हिंदुस्तान) ऑल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) ने यूजीसी गाइडलाइन द्वारा अनिवार्य परीक्षा लेने एवं सिलेबस से कई महत्वपूर्ण चैप्टर को गायब करने पर गहरा रोष जताया है। एआईएसएफ के राष्ट्रीय सचिव सुशील कुमार एवं राज्य अध्यक्ष रंजीत पंडित ने बयान जारी कर कहा कि मौजूदा केन्द्र सरकार कोरोना महामारी में आम इंसानों को जरूरी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफ़ल रही है। बिना तैयारी के किए गए लॉकडाउन में प्रधानमंत्री की बातों में फंसकर भोली भाली जनता यहाँ तक कि फ़िल्मी सितारों ने भी ताली-थाली बजाया और दीया जलाया। पैदल चलते हुए एवं बेहतर सुविधाओं के अभाव में असमय हजारों लोगों की जानें चली गई। महामारी के संक्रमण की जद में फ़िल्मी सितारे भी आ चुके हैं। हजारों बेकसूर आम इंसानों की जान लेने के बाद अब केन्द्र सरकार देश के होनहार छात्रों की जान लेने पर क्यूँ आमादा है? किसी भी प्रकार के परीक्षा लेने पर रोक लगाते हुए तत्काल सभी विद्यार्थियों का जनरल प्रमोशन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दिल्ली और बंगाल सरकार के 80:20 के प्रस्ताव को भी माना जा सकता है, जिसमें 80 पुराने अंक एवं 20 आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर मिलेंगे। स्थिति समान्य होने पर जो छात्र आवेदन दें उनकी वैकल्पिक परीक्षा सरकार ले सकती है।

एआईएसएफ नेताओं ने एनसीईआरटी एवं सीबीएसई की किताबों से मोदी सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण चैप्टर हटाने को कोरोना काल मे दिनदहाड़े लूट का आपराधिक प्रयास करार दिया है। इस लूट के दरम्यान देश के भविष्य को सरकार अंधकारमय करना चाहती है। इस अनोखी लूट से सरकार ने 30 फीसदी सिलेबस कम करने के नाम पर नागरिकता, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, जेण्डर, राज्य सरकार, जीएसटी, नोटबन्दी जैसे महत्वपूर्ण विषयों को हटा दिया है। जिससे इन विषयों के जाने बिना बच्चे वैज्ञानिक,तार्किक चेतना एवं विविधता से रूबरू हुए बिना रह जाएं। सिलेबस तो कम होना हीं चाहिए लेकिन ऐसे महत्वपूर्ण विषयों को जाने बिना तत्काल ऐसी किसी कार्रवाई से सरकार को बचना चाहिए।

एआईएसएफ ने परीक्षा लेने के यूजीसी के फरमान को एवीबीपी द्वारा जायज ठहराने पर भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि एक ऐसा संगठन जिसके नाम में विद्यार्थी है लेकिन इसके अध्यक्ष प्रोफेसर होते हैं। इसको कभी भी छात्रों के सवालों से कुछ लेना देना नहीं रहा है। आने वाले दिनों में छात्र समुदाय इससे हिसाब लेगा।

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