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बिहार को बचाने के लिए सदन छोड़ कर सड़क पर संघर्ष का रास्ता चुना- उपेंद्र कुशवाहा

पटना। विरासत बचाने और बिहार को फिर से अराजकता और अंधेरे में ढकेलने की साजिश के खिलाफ राष्ट्रीय लोक जनता दल की विरासत बचाओ नमन यात्रा को मिल रहे जनसमर्थन से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उपेंद्र कुशवाहा और पार्टी कार्यकर्ता उत्साहित हैं. पार्टी नेता फजल इमाम मल्लिक ने यहां यह जानकारी दी है.

दूसरे चरण की यात्रा की शुरुआत उपेंद्र कुशवाहा ने भागलपुर में शहीद तिलकामांझी के स्मारक पर माल्यर्पण से किया. इससे पहले उन्होंने सुलतानगंज में एक जनसभा को संबोधित किया और लोगों से कहा कि वे बिहार को फिर से अंधेरे में ले जाने की साजिश के खिलाफ एकजुट हों.

मल्लिक के मुताबिक सुलतानगंज से वे नाथनगर, तारापुर, कोतवाली होते हुए भागलपुर पहुंचे और तिलकामांझी के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके संघर्ष और शहादत को याद करते हुए लोगों से कहा कि बिहार को फिर से अंधेरे और अराजकता से बचाने के लिए उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना. वे सदन में थे, चाहते तो रह सकते थे. अभी चार साल का कार्यकाल बाकी था. लेकिन बिहार को अंधेरे और अराजकता में फिर से ले जाने की जब साजिश की जाने लगी तो उन्होंन सड़क को सदन पर तरजीह दी और बिहार के आम अवाम के सपनों के लिए सड़क पर उतर कर संघर्ष का फैसला किया.

उपेंद्र कुशवाहा ने लोगों को आगाह किया कि बिहार को फिर से 2005 से पहले वाली स्थिति में ले जाने की साजिश रची जा रही है. जिस लव-कुश समाज, अतिपिछड़ों, अकलीयतों, महादलितों और अन्य समाज के लोगों ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को ताकत देकर बहुत मशक्कत के बाद बिहार को अराजकता और अंधेरों के दौर से निकाला था, फिर से उन लोगों को ही विरासत सौंपने की तैयारी नीतीश कुमार कर रहे हैं.

जदयू में रहते हुए हमने उनसे कई बार कहा कि विरासत सौंपना ही है तो पड़ोसी के घर में मत देखें. अपने घर में किसी भी लव-कुश या अतिपिछड़ा समाज के व्यक्ति को विरासत सौंपें ताकि वह कर्पूरी ठाकुर के सामाजिक न्याय और उनके मूल्यों को स्थापित कर बिहार को उस भयानक दौर में ले जाने से बचाए. लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उन्होंने अपनी अलग राह पकड़ ली.

मल्लिक ने बताया कि भागलपुर से कुशवाहा यात्रा के क्रम में जिछो होते हुए बांका जिला के अमरपुर पहुंचे और यहां जनसभाओं को संबोधित किया. फिर शंभुगंज और फुलिदुमर होते हुए बेलहर पहुंचे और लोगों से संवाद स्थापित किया. इसके बाद कुशवाहा संग्रामपुर, सरकटिया मोड़, दिघी और लक्ष्मीपुर होते हुए जमुई पहुंचे और सभाओं को संबोधित किया. रात्रि विश्राम जमुई में किया. दूसरे चरण की यात्रा के दूसरे दिन कुशवाहा ने दर्जनों सभाओं को संबोधित कर लोगों से संवाद कर राष्ट्रीय लोक जनता दल के गठन पर विस्तार से चर्चा की.

मल्लिक ने बताया कि शुक्रवार को कुशवाहा जमुई से अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएंगे और सिकंदरा, अलीगंज होते हुए शेखोदेवरा पहुंच कर जेपी के स्मारक पर माल्यार्पण करेंगे और फिर गहलौर में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी को नमन कर गया पहुंचेंगे.

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