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रालोजद की विरासत बचाओ नमन यात्रा को मिल रहा है व्यापक जनसमर्थन- मल्लिक

पटना । राष्ट्रीय लोक जनता दल की विरासत बचाओ नमन यात्रा को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की नीतियों और नई पार्टी के गठन के फैसले का लोग स्वागत कर रहे हैं. पार्टी नेता फजल इमाम मल्लिक ने यहां यह जानकारी दी है. कुशवाहा यात्रा के क्रम में अब तक बिहार के करीब पच्चीस जिलों में लोगों से संवाद कर चुके हैं.

मल्लिक के मुताबिक यात्रा को लोगों को इतना समर्थन मिलेगा, इसकी कल्पना पार्टी ने यात्रा शुरू होने से पहले नहीं की थी. लेकिन कुशवाहा को सुनने और उनके फैसलों के समर्थन में देर रात तक जिस तरह लोग जमा रहते हैं उससे लोगों के उत्साह का पता चलता है. मल्लिक ने बताया कि उनकी सभाओं में हर तबके के लोग शिरकत कर रहे हैं. लोगं को उम्मीद है कि कुशवाहा बिहार को फिर से अंधेरे और अराजकता में ले जाने नहीं देंगे और समतामूलक समाज का निर्माण कर बापू, कर्पूरी ठाकुर और जेपी के मूल्यों और आदर्शों को स्थापित करेंगे.

मल्लिक ने कहा कि कुशवाहा ने पश्चिम चंपारण के बापू आश्रम से यात्रा की शुरुआत की थी. उन्होंने इस दौरान महात्मा गांधी, बतक मियां, जेपी, कर्पूरी ठाकुर, सूरज नारायण सिंह, फणीश्वरनाथ रेणु, जुब्बा साहनी, तिलका मांझी, श्रीकृष्ण सिंह, अब्दुल कयूम अंसारी, चंद्रशेखर उर्फ चंदू, दशरथ मांझी, बाबू जगजीवन राम, वीर कुंवर सिंह, शहीद निशान सिंह, डा लाल सिंह त्यागी व गुरुसहाय लाल सहिंत दर्जनों महापुरुषों के स्मारक पर माल्यार्पण किया. उन्होंने इस दौरान सैंकड़ों सभाओं को संबोधित किया.

सोमवार को उनकी यात्रा का समापन अरवल में होगा. अरवल में शहीद जगदेव प्रसाद के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर वे अपने इस अभियान को विराम देंगे. रालोजद के गठन के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने इस यात्रा के जरिए लोगों से संवाद किया और बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लव-कुश और अतिपिछड़ा समाज की विरासत उन हाथों में ही सौंपना चाहते हैं जिनके दौर में बिहार में अन्याय, अंधेरे और अपहरण का बोलबाला था.

उन्होंने लोगों को बताया कि इसी वजह से उन्होंने जदयू छोड़ा और रालोजद का गठन किया ताकि बिहार को गिरवी रखने से बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि आप ताकत देंगे तो हम बिहार को उन हाथों में जाने से बचा कर वंचितों और शोषितों को न्याय दिलाएंगे. मल्लिक ने बताया कि यात्रा के दौरान जदयू और दूसरे दलों के सैंकड़ों नेताओं ने श्री कुशवाहा की नीतियों से प्रेरित होकर रालोजद की सदस्यता ग्रहण की.

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