पैक्स एवं सहकारिता की अपेक्षाएं पूरी करने की कोशिश करेंगे- नीतीश कुमार

पटना (जागता हिंदुस्तान) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र स्थित बापू सभागार में आयोजित सहकारिता महासम्मेलन 2020 के कार्यक्रम में शामिल हुए। दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता महासम्मेलन के अवसर पर आप सभी का अभिनंदन करता हूं। आयोजकों को इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि आपलोगों ने मुझे इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया। मुझे इस बात की भी खुशी हो रही है कि आज कई पुराने लोगों से मुलाकात हुई, जिनसे केंद्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान विचार विमर्श करने का मौका मिलता था। केंद्र में कृषि मंत्री रहने के दौरान सहकारिता के क्षेत्र में भी कई काम करने का मौका मिला। सहकारिता को स्वायतता देने के लिए कदम उठाया। बाद में प्रदेश की जिम्मेवारी मिलने के कारण यहां के कामों में व्यस्तता रहती है और लोगों के लिए हर क्षेत्र में काम कर रहे हैं। लोगों की सेवा करना ही हमारा धर्म है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस जगह पर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है, यह 5 हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाला स्टील स्ट्रक्चर निर्मित यूनिक बापू सभागार भवन है। इसके स्टील स्ट्रक्चर के निर्माण का ख्याल चीन यात्रा के दौरान मेरे मन में आया था। इस तरह का यूनिक भवन पूरे देश में कहीं भी नहीं है। सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र के इस परिसर में ज्ञान भवन है और सभ्यता द्वार भी है। उन्होंने कहा कि मैं नवनिर्वाचित पैक्स अध्यक्षों को बधाई देता हूं। आज से 20 वर्ष पहले पैक्स की, बिस्कोमान की क्या हालत थी, आप सबको पता है। हमलोगों ने सरकार में आने के बाद पैक्स के गठन के लिए, उसके चुनाव के लिए काम शुरु किया। पैक्स में सदस्यों की संख्या बढ़ी है। धान की अधिप्राप्ति बड़े पैमाने पर हो रही है। इस वर्ष भी धान अधिप्राप्ति में जो कठिनाइयां मौसम के कारण आ रही हैं उसके समाधान के लिए हमलोग प्रयासरत हैं। मुख्य सचिव और सहकारिता मंत्री इसकी निगरानी कर रहे हैं। हम यहां इसलिए भी आए हैं कि आपकी समस्याएं जान सकें। उन्होंने कहा कि पैक्स को 15 लाख रुपए तक के कृषि यंत्र दिए जाएंगे, जिसमें केंद्र सरकार की तरफ से 10 लाख रुपए और राज्य सरकार की तरफ से 5 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। हमारी इच्छा है कि कृषि यंत्र आपलोगों को उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बिहार में आपदा प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं थी। हमलोगों ने सरकार में आने के बाद 2007 से आपदा प्रबंधन के लिए काम किया। एस0ओ0एस0 का गठन किया गया। वर्ष 2007 में बाढ़ से 22 जिले और ढाई करोड़ लोग प्रभावित हुए थे। सभी लोगों को अन्य सहायता के साथ-साथ एक-एक क्विंटल अनाज भी उपलब्ध कराया गया। वर्ष 2008 में कोसी त्रासदी में लोगों की सहायता की गई। उन्होंने कहा कि पहले मॉनसून का आगमन 15 जून तक होता था, जिसका समय अब परिवर्तित होने लगा है। पहले औसत वर्षापात 1200 से 1500 मि0मी0 था वह घटकर पिछले 30 वर्षों में 1027 मि0मी0 तथा पिछले 13 वर्षों में घटकर 901 मि0मी0 पर आ गया है। भूजल स्तर में कमी आ रही है। जलवायु में परिवर्तन के कारण उत्पन्न संकट और भूजल स्तर में गिरावट पर चर्चा के लिए 13 जुलाई 2019 को सभी दलों के विधायकों और विधान पार्षदों की संयुक्त बैठक में जल-जीवन-हरियाली चलाने का निर्णय लिया गया। जल-जीवन-हरियाली अभियान का मतलब है जल और हरियाली के बीच जीवन है। जीवन के एक तरफ जल और एक तरफ हरियाली रहेगा, तभी जीवन सुरक्षित होगा। इसमें 11 अवयवों को शामिल किया गया है। जिसमें 07 अवयव जल संरक्षण से संबंधित, 01 अवयव हरियाली से, 01 अवयव मौसम के अनुकूल कृषि एवं फसल अवशेष प्रबंधन से, 01 अवयव ऊर्जा संरक्षण तथा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से एवं 01 अवयव निरंतर अभियान चलाने से संबंधित है। हाल ही में 19 जनवरी 2020 को जल-जीवन-हरियाली अभियान के पक्ष में पर्यावरण संरक्षण के लिए बिहार के 5 करोड़ 18 लाख से अधिक लोगों ने 18 हजार कि0मी0 से भी ज्यादा लंबी मानव श्रृंखला बनायी थी। यह पर्यावरण के प्रति एक सकारात्मक प्रयास बिहार के लोगों द्वारा किया गया है। बिहार में कई विशेष काम होते रहते हैं, जिनकी चर्चा भी होनी चाहिए। हमलोग काम पर ध्यान देते हैं पब्लिसिटी पर नहीं। हमलोगों ने निर्णय किया है कि प्रत्येक माह के पहले मंगलवार को एक घंटे सरकारी स्कूलों एवं सरकारी संस्थानों में जल-जीवन-हरियाली के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करेंगे। इसमें पर्यावरण संरक्षण के नए-नए सुझाव सामने आएंगे। यह चर्चा को-ऑपरेटिव सोसायटी एवं पैक्स में भी करायी जाय। को-ऑपरेटिव सोसायटी भी एक महत्वपूर्ण संस्थान है, जिसके माध्यम से लोगों को जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रति जागरुक करें। नई पीढ़ी का जल-जीवन-हरियाली अभियान के प्रति जागरुक होने से उनका भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि रोडमैप का निर्माण होने से बिहार में कई फसलों का उत्पादन बढ़ा है। गेहूं, चावल, मक्का, सब्जी एवं फलों का उत्पादन बढ़ रहा है। बिहार अनाज के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने लोगों की सुविधाओं के लिए काम किया है। ऐसे में स्वाभाविक है कि लोगों की इससे आकांक्षाएं और बढ़ेंगी। को-ऑपरेटिव सोसायटी को सुविधा हो तथा किसानों के कृषि उत्पाद को उचित लाभ मिल सके इसके लिए गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा गया। टोलों को भी पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है। गांव के अंदर पक्की गली-नाली का निर्माण किया जा रहा है। हर घर नल का जल पहुंचाया जा रहा है और इस वर्ष चुनाव के पूर्व ये सभी काम पूरे कर लिये जायेंगे। हर घर तक बिजली पहुंचा दी गई है। सारे जर्जर बिजली के तार बदल दिए गए हैं। खेती के लिए कृषि फीडर के माध्यम से हर इच्छुक किसान को कनेक्शन दिया जा रहा है। फसल बीमा की जगह फसल सहायता योजना चलायी गई है। उन्होंने कहा कि पैक्स को सुविधाएं दी गई हैं, सहकारिता का सम्मान किया गया है और जो भी आप सबकी अपेक्षाएं होंगी, उसे पूरी करने की कोशिश करेंगे। आपलोगों की कोई समस्याएं हैं, कोई मन में बात हो तो उसे सहकारिता मंत्री से बताएं, हमलोग उस पर काम करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी पैक्स की संख्या 1 करोड़ 24 लाख हो गई है। इसमें महिलाओं की संख्या 2 लाख से बढ़कर 36 लाख हो गई है। इससे स्वयं सहायता समूह भी जुड़ने लगे हैं। सहकारी बैंकों में 25 महिला सहायक प्रबंधक की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। धान की खरीद की व्यवस्था रैयत और गैर रैयत किसानों के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि पैक्स जो कृषि यंत्र खरीदेंगे उनसे मेरा निवेदन है कि ये 4 कृषि यंत्र हैपिसिडर एवं जीरो टिलेज मशीन, रोटरी मल्चर, स्ट्रारीपर तथा रीपर कंबाइंडर यंत्र जरुर खरीदें। इस पर राज्य सरकार द्वारा 75 फीसदी की सब्सिडी दी जा रही है। जीविका समूह भी यंत्रों को खरीद रही हंै।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2917 पैक्सों में कृषि संयंत्र खरीदने के लिए 15 लाख रुपए जे0एम0 पोर्टल के माध्यम से भुगतान किए गए हैं। क्षेत्रीय सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए 5 प्रमंडलों एवं 17 जिलों में 22 सहकार भवन के लिए 56 करोड़ 35 लाख का आवंटन किया गया है। उन्होंने कहा कि जितने लोग सहकारिता से जुड़ेंगे उतना ही उसका विस्तार होगा। हमारी इच्छा है कि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिले। हमसे जो भी मदद होगा वो करेंगे। कोई भी किसी पार्टी से जुड़ा रहे यह उसका अधिकार है। हम इज्जत सहकारिता की एवं इससे जुड़े लोगों की करते हैं। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। आपलोगों के हरसंभव सहयोग के लिए तैयार हैं। आयोजकों से मेरा आग्रह है कि बिहार के बाहर से आये हुये लोगों को बिहार के कुछ विषिष्ट जगहों जैसे- गया, बोधगया, राजगीर, वैषाली जगहों पर घूमाने ले जायें ताकि वे बिहार की खासियतों से अवगत हो सकें। बिहार में बदलाव को समझ सकें।

मुख्यमंत्री का स्वागत मखाने की माला, पुष्प-गुच्छ, अंगवस्त्र, गणेश जी की मूर्ति और सम्मान पत्र भेंटकर किया गया। मुख्यमंत्री सहित मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों के द्वारा एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। जल-जीवन-हरियाली अभियान की अवधारणा को अंगीकृत करने के लिये शपथ भी दिलायी गयी। नीलम चैधरी की टीम निनाद के द्वारा गणेश स्तुति एवं वंदे मातरम की प्रस्तुति की गई।

कार्यक्रम को कृषि मंत्री श्री प्रेम कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह, सांसद चिराग पासवान, अध्यक्ष राज्य सहकारी बैंकों का राष्ट्रीय संघ, नवी मुंबई दिलीप भाई संघाणी, सांसद सह भारतीय राष्ट्रीय संघ के अध्यक्ष डॉ0 चंद्रपाल सिंह यादव, इफ्को नई दिल्ली के प्रबंध निदेषक डॉ0 उदय शंकर अवस्थी, बिहार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे एवं बिस्कोमान के अध्यक्ष डॉ0 सुनील कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर अध्यक्ष शहरी सहकारी बैंक तथा ऋण समितियों का परिसंघ नई दिल्ली ज्योतिंद्र मनसुख लाल मेहता, प्रबंध निदेशक राज्य सहकारी बैंकों के राष्ट्रीय संघ नवी मुंबई भीमा सुब्रमण्यम, कृभको नई दिल्ली के प्रबंध निदेषक राजन चैधरी, प्रबंध निदेशक नेफेड संजीव कुमार चड्ढा, निदेशक इफ्को नई दिल्ली आर0पी0 सिंह, निदेशक इफ्को नई दिल्ली योगेंद्र कुमार, अध्यक्ष राष्ट्रीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ नई दिल्ली टी0 प्रसाद राव डोरा, बांग्लादेश के प्रतिनिधि जनाब मुलूद्दीन, केन्या के प्रतिनिधि जॉर्ज मंगावी सहित बिहार के बाहर से आए हुए अन्य विशिष्ट अतिथिगण, विभिन्न राज्यों से सहकारिता प्रतिनिधिगण, पैक्स के अध्यक्षगण, अन्य सहकारी प्रतिनिधिगण, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार सहित अन्य पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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